मुबारक हो मुबारक ईद हो भाई
अगरचे याद करने पर भी तुमको याद न आऊं
तो कोई फर्क न पड़ता
गिला शिकवा मोहब्बत में
गवारा ही नहीं मुझको
मुबारकबाद देता हूँ
तवक्को है इसे तस्लीम कर लेना
गुज़ारिश है दुआ इक मांगना ये कि
हमारी इस मोहब्बत को सलामत
रख खुदा मेरे
मैं भी इबादत में कहूँगा
ओ मेरे मौला अता कर इतनी खुशियाँ
यार को मेरे कि उसकी झोली कि
उसकी झोली फैलाई छौटी लगे उसको
खुदा से यह भी कह दूंगा कि
रब बाँहों को मेरी उतनी लम्बाई
अता कर कि
पसारूं और समंदर पार
बैठा ही गले लग जाऊं
अपने यार से इस दिन